आदतें नस्लों का पता देती है l आदत इख़लाक़ और तर्ज अमल खून और नस्ल दोनों की पहचान करा देते हैं
आदतें नस्लों का पता देती है , एक बादशाह के दरबार में एक अनजान आदमी नौकरी मांगने के लिए हाजिर हुआ काबिलियत पूछी गई तो कहा सियासी हूं (अरबी में सियासी का मतलब अफहाम फहम तफहीम से मसला हल करने वाले को कहते हैं ) बादशाह के पास सियासतदानों की भरमार थी उसे खास घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज बना दिया गया जिस का इंचार्ज हाल ही में इंतकाल कर गया था। कुछ रोज़ बाद बादशाह ने उसे अपने सबसे महंगे प्यारे घोड़े के बारे में पूछा उसकी चाल ढाल हक़ीक़त उसने कहा कि घोड़ा नस्ली नही है। बादशाह को हैरत हुई उसने जंगल से घोड़े वाले को बुलवाया जिस से लिया था उस से पूछा क्या यह बातें सच है उसने बताया घोड़ा नस्ली है लेकिन इसकी पैदाइश पर इसकी माँ मर गई थी यह एक गाय का दूध पीकर उस के साथ पला बढ़ा है। अस्तबल के इंचार्ज को बुलाया गया। बादशाह ने सवाल किया तुम्हें कैसे पता चला यह घोड़ा नस्ली नहीं है उसने कहा जब यह घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके जबकि नस्ली घोड़ा घास मुंह में लेकर सर उठा लेता है। बादशाह उसकी अकल सोच से बहुत खुश हुआ उसके घर अनाज भुने हुए दुंबे औ...