वो कौन से सहाबी है जो खौफ़े खुदा से इतना रोया करते थे कि आप के चेहरे पर आंसूओं के बहने की वज्ह से दो सियाह निशान पड़ गए, हज़रते उमर , islamic stories

वो कौन से सहाबी है जो खौफ़े खुदा से इतना रोया करते थे कि आप के चेहरे पर आंसूओं के बहने की वज्ह से दो सियाह निशान पड़ गए



 जवाब 
 हज़रते उमर 


  तफ्सील 

हज़रते उमर  जब कुरआने मजीद की कोई आयत सुनते तो खौफ़ से बेहोश हो जाते, एक दिन एक तिन्का हाथ में ले कर कहा : काश ! मैं एक तिन्का होता ! कोई काबिले जिक्र चीज़ न होता! काश मुझे मेरी मां न जनती ! और खौफ़े खुदा से आप इतना रोया करते थे कि आप के चेहरे पर आंसूओं के बहने की वज्ह से दो सियाह निशान पड़ गए थे।*  


हुजूर  ने फ़रमाया :  तर्जमा : जो शख़्स खौफ़े खुदा से रोता है वोह जहन्नम में हरगिज़ दाखिल नहीं होगा इसी तरह जैसे कि दूध दोबारा अपने थनों में नहीं जाता।
'दकाइकुल अख्बार' में है कि क़ियामत के दिन एक शख्स को ला
.तर्जमए कन्ज़ुल ईमान : तो लोगों से खौफ़ न करो और मुझ से डरो 

या जाएगा, जब उस के आ'माल तोले जाएंगे तो बुराइयों का पलड़ा भारी हो जाएगा चुनान्चे, उसे जहन्नम में डालने का हुक्म मिलेगा, उस वक्त उस की पलकों का एक बाल अल्लाह की बारगाह में अर्ज़ करेगा कि ऐ रब्बे जुल जलाल ! तेरे रसूल ﷺ ने फ़रमाया था जो अल्लाह तआला के ख़ौफ़ से रोता है अल्लाह तआला उस पर जहन्नम की आग हराम कर देता है और मैं तेरे खौफ़ से रोया था।*


तर्जमए कन्ज़ुल ईमान : तो इन से न डरो और मुझ से डरो अगर ईमान रखते हो 


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